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Saturday, August 15

74 वां स्वतंत्रता दिवस : मानसिक गुलामी आज भी बरकरार

 

74 वां स्वतंत्रता दिवस : मानसिक गुलामी आज भी बरकरार

{मधुरेश प्रियदर्शी की विशेष रिपोर्ट}

अपने देश भारत में लोकतंत्र का परचम लहरा रहा है।आज हम सभी आजाद भारत के स्वतंत्र नागरिक के रुप में देश की खुली हवा में सांस ले रहे हैं। हम आज एक लोकतांत्रिक देश हैं जो करीब दो सौ वर्षों तक अंग्रेजों का गुलाम बना रहा। भारत को लोकतांत्रिक बनाने और अंग्रेजो की गुलामी से आजाद कराने के लिए हमारे असंख्य पूर्वजों ने अपनी कुर्बानियां दी तब कहीं जाकर हमारा देश 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ। हमारे देश के वीर सपूतों ने भारत भूमि को अंग्रेजों के चंगुल से आजाद कराने के लिए सिर्फ अपनी जान ही नहीं दी बल्कि जिन्दा रहते हुए भी उन्होंने कई तरह की यातनाएं सही और कुर्बानियां भी दी। जहां माताओं ने अपने लालों को खोया तो वहीं बहनों ने अपने भाईयों और अपने सुहागों को देश के लिए जान गंवाते हुए देखा।

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वास्तव में उस दर्द का जितना भी वर्णन किया जाये वो कम ही है। हमारे वीर सपूतों ने जिस स्वतंत्र भारत की कल्पना कर अपने प्राण न्योछावर किये थे शायद उस कल्पना को हम साकार नहीं कर पाये हैं। हम आज भी कई मायनों में गुलाम बने हुए हैं। ये गुलामी हमारे समाज के भीतर ही फैली हुई है और उसने हमारी मानसिकता पर अपनी अमीट छाप छोड़ रखी है। इस घिनौनी मानसिकता को हम हिन्दुस्तानी शायद बदलना ही नहीं चाहते हैं।इसी कारण आज भी हम कई तरह से गुलाम बने हुए हैं। यह बड़े ही दुर्भाग्य का विषय है कि आजादी के चौहत्तर साल बाद भी हम अपनी मानसिकता के गुलाम बने हुए हैं।

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आजादी के मतवाले वीर सपूतों ने हमारे देश भारत के लिए एक ऐसे समाज की कल्पना की थी जिसमें कोई बड़ा या छोटा न हो, किसी के मन में किसी के प्रति कोई बैर या भेदभाव न हो। सभी भारतीय मिलजुलकर आपसी प्रेम और सौहार्द की भावना से रहे। जाति और धर्म का भेद भुलाकर स्वयं को सिर्फ भारतीय ही समझे मगर ऐसा
हो न सका

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देश को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, सुभाष चन्द्र बोस, जवाहर लाल नेहरू, भगत सिंह, चन्द्र शेखर आजाद, लाल बहादुर शास्त्री, राजगुरू और अश्फाकउल्ला खां जैसे कई वीरों ने अपना योगदान दिया है। हमारे देश के ऐसे कई वीर सपूतों ने मातृभूमि को अपने लहू से सींचकर हमारे लिए स्वतंत्र धरती का निर्माण किया है। इन सभी वीरों का जिक्र कर पाना तो इस लेख में संभव नहीं होगा किन्तु हम देश के प्रति उनके जज्बे और साहस को प्रणाम जरूर कर सकते हैं। वाकई आज हमें ऐसे ही जज्बे की आवश्यकता है। हमें अपने देश के वीर शहीदों से प्रेरणा लेकर जीवन में आगे बढ़ना होगा और अपनी मानसिकता को बदलकर देश एवं समाज के लिए भी सोचना होगा।

देश के लिए मर मिटना कुबूल है हमें।

अखंड भारत के सपने का जूनून है हमें।।


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