15 अगस्त : आखिर हम कब समझेंगे आजादी का मतलब - HINDUSTAN MEDIA

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Saturday, August 15

15 अगस्त : आखिर हम कब समझेंगे आजादी का मतलब

 

15 अगस्त : आखिर हम कब समझेंगे आजादी का मतलब

मधुरेश प्रियदर्शी की कलम से........

"लड़े वो वीर जवानों की तरह,
ठंडा खून भी फौलाद हुआ,
मरते मरते भी कई मार गिराए,
तभी तो देश आजाद हुआ।"

आज जश्न-ए-आजादी का दिन है। आज ही के दिन 15 अगस्त 1947 को हमारा देश भारत आजाद हुआ था। तबसे हम आज़ाद देश में रहते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि हम अपनी आज़ादी का दुरुपयोग करें। यह महज पहली बार नहीं है जब इस तरह की चीजें हमारे सामने होती हैं। क्या हम सही मायने में मिली आजादी का जश्न मनाते हैं, मगर कभी क्या हम इस बारे में विचार करते हैं कि आजादी सही मायनों में साफ हवा में खुलकर सांस लेने की है, या इसका परिपेक्ष और भी वृहद है?

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क्या कभी हम सोचते हैं कि जगह-जगह कूड़ा-कचरा फैलाने की आजादी हमें किसने दी है, हम कूड़ा-कचरा को उसकी निर्धारित जगहों पर क्यों नहीं फेंकते हैं? मौका मिलते ही लोग जहां-तहां कूड़ा-कचरा फेंक देते हैं। जबकि, हमें यह पता होता है कि ऐसा करना गलत है। फिर भी हम अपनी आदतों से बाज नहीं आते, बल्कि इसे अपनी आजादी समझते हैं। क्या यही है हमारे लिए आजादी का वास्तविक मतलब?

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 हमारे देश में अन्य देशों की तुलना में उन्नत सुविधाएं उपलब्ध हैं और निसंदेह हम खुश नसीब हैं। फिर हमें सामाजिक बुराइयों और कुरीतियों पर भी अपने विचार खुलकर व्यक्त करने होंगे, उस पर बात करनी होगी, धार्मिक बंधन और मनोभावों, पारस्परिक समताओ से परे और इसकी आड़ में खेलने वाले को पवेलियन का रास्ता दिखाना होगा, तभी असल में मिली आजादी का जश्न चार चांद लगा कर उभरेगा।

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हम आजाद देश में रहते हैं, इसलिए जो हमारे धर्म और जाति का नहीं है, उसके साथ हम अन्याय करेंगे? उसके अधिकारों का हनन करेंगे? मौका मिलते ही हम दंगा-फसाद करेंगे? कुछ लोगों के लिए आजादी का यही मतलब है। अगर ऐसा नहीं होता, तो आज देश में जाति और धर्म के नाम पर भेदभाव के साथ ही दंगे-फसाद नहीं होते। देश में लोग अमन-चैन से रहते, लेकिन कुछ लोगों के लिए आजादी का मतलब यही है। आइए, इस स्वतंत्रता दिवस के पावन मौके पर हम सभी अपने देश की एकता, अखंडता एवं सामाजिक सद्भाव को अक्षुण रखने का सकंल्प लें। 

जय हिंद वंदेमातरम.........



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