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Tuesday, May 5

देश की सुरक्षा में शहीद हो गया चंपारण का लाल पिन्टू

देश की सुरक्षा में तैनात चंपारण का लाल पिंटू कुमार चौरसिया हुआ शहीद, जिले में शोक की लहर

न्यूज डेस्क/बेतिया/बिहार

चंपारण समेत बिहार के लिए एक  मनहूस खबर सिक्किम से मिल रही है। सिक्किम के रणकोश में तैनात चंपारण का एक लाल   शहीद हो गया है। भारतीय सेना में जीडी के पद पर सिक्किम में तैनात आर्मी का जवान पिंटू कुमार चौरसिया बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के मझौलिया प्रखंड अन्तर्गत बेखबरा गांव का रहने वाला था। आर्मी के जवान पिंटू की शहादत की खबर मिलते ही उसके परिवार में कोहराम मचा है। शहीद के गांव में मातमी सन्नाटा पसर गया है।

पहाड़ पर चढ़ने के दौरान ऑक्सीजन की कमी बनी मौत का कारण

सिक्किम के रणकोश में तैनात आर्मी के जवान 23 वर्षीय पिंटू कुमार चौरसिया विगत 03 मई को शहीद हो गया। मिल रही जानकारी के अनुसार शहीद पिंटू का पार्थिव शरीर 06 मई को बेखबरा गांव पहुंचेगा। शहीद सैनिक के परिजनों के अनुसार पहाड़ पर चढ़ने के दौरान ऑक्सीजन की कमी होने से पिन्टू की मौत हो गई। शहीद जवान के परिजनों ने बताया कि सेना की ओर से विशेष विमान द्वारा जम्मू- कश्मीर से शहीद का शव लाया जा रहा है। शहीद पिन्टू का शव बुधवार की सुबह दस बजे तक बेखबरा पहुंचने की उम्मीद है।

वर्ष 2016 में सेना में बहाल हुआ था शहीद पिन्टू

उत्तरप्रदेश के गोरखपुर रेलवे के वर्कशॉप में कार्यरत शहीद पिंटू के पिता नागेंद्र प्रसाद चौरसिया को एक तरफ बेटे की मौत का गम तो दूसरी तरफ उसके शहादत पर गर्व भी है। उन्होंने बताया कि  पिंटू में बचपन से ही देशभक्त था। उसकी ज्यादा रुचि खेलकूद में थी।  वर्ष 2016 में उसकी बहाली भारतीय सेना में हुई थी। उसी समय से वह सिक्किम में पदस्थापित था। शहीद पिन्टू की अभी शादी भी नहीं हुई थी।  शहीद पिंटू के बड़े भाई सुबोध कुमार चौरसिया मझौलिया प्रखंड के कृषि विभाग में  कृषि सलाहकार के पद पर तैनात हैं। शहीद जवान की एक बहन राजधानी दिल्ली मेंं सीआईएसएफ में कार्यरत है।

चार भाईयों में सबसे छोटा था शहीद पिन्टू

शहीद जवान पिन्टू कुमार चौरसिया की प्रारंभिक शिक्षा मोतिहारी में हुई थी। 2016 में वह सेना में बहाल हुआ था। अपनी बहाली के समय से ही वह सिक्किम में पदस्थापित था। बेखबरा गांव में जवान के शहीद होने की सूचना मिलते ही मातमी सन्नाटा पसर गया। परिवार वालों के साथ ही गांव के लोग भी अपने लाल का अंतिम दर्शन करने के लिए उसके पार्थिव शरीर के गांव पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं।

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