शिक्षकों की हड़ताल को दबाने के लिए षडयंत्र रच रही बिहार सरकार : शिक्षक संघ - HINDUSTAN MEDIA

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Thursday, April 2

शिक्षकों की हड़ताल को दबाने के लिए षडयंत्र रच रही बिहार सरकार : शिक्षक संघ

कोरोना से संघर्ष के साथ मांगों के पूरा होने तक हड़ताल जारी रखेंगे शिक्षक, सीएम अपनी चुप्पी तोड़े

न्यूज डेस्क/मोतिहारी/बिहार

सूबे बिहार में जारी कोरोना संकट के मद्देनजर हड़ताली शिक्षकों से अविलंब वार्ता कर सरकार को हड़ताल समाप्त कराने की दिशा में पहल करनी चाहिए। लेकिन, विडंबना यह है कि सरकार शिक्षक आंदोलन को दबाने के लिए षडयंत्र रचने में जुटी है। उक्त बातें बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति पूर्वी चंपारण के जिलाध्यक्ष प्रियरंजन सिंह ने गुरुवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके कही। उन्होंने कहा कि विभागीय पदाधिकारियों के द्वारा व्हाटसएप्प के जरिये बगैर काम किये योगदान करके हड़ताल से वापस लौटने का लॉलीपाप शिक्षकों को दिखाया जा रहा है।

17 फरवरी से हड़ताल पर हैं सूबे के चार लाख नियोजित शिक्षक

यहां बता दें कि विगत 17 फरवरी से सूबे के चार लाख से अधिक नियोजित शिक्षक लगातार सहायक शिक्षक- राज्यकर्मी का दर्जा देने तथा नियमित शिक्षकों के समान वेतनमान एवं सेवा शर्त को लेकर हड़ताल पर हैं। इसी बीच कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के कारण हर जगह भयावह हालात बनते दिख रहे हैं। जिलाध्यक्ष ने कहा कि शिक्षकों के समक्ष भी चौतरफा संकट की स्थिति बन गई है। उन्होंने कहा कि सरकार की चुप्पी के कारण शिक्षक हड़ताल पर बने रहने को बाध्य हैं। बिहार सरकार ने अपने मल्टी टास्किंग कर्मी नियोजित शिक्षक परिवारों को कोरोना और भूखमरी के बीच पीसने को छोड़ दिया है। चार लाख से अधिक शिक्षक और उनके वेतन पर आश्रित लाखों परिवारिक सदस्यों के प्रति बिहार सरकार की संवेदनहीनहीनता चरम पर है। श्री सिंह ने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस बात की चिंता नहीं है कि उनके ही शिक्षक अपने परिवार के साथ बगैर वेतन के कोरोना जैसी खातरनाक महामारी का सामना कैसे कर सकेंगे। जबकि दूसरी ओर विभिन्न सरकारों के द्वारा अलग-अलग विभागों में अग्रिम वेतन का भुगतान तथा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में एक मुश्त अग्रिम राशि का भुगतान किया जा रहा है।

लॉकडाउन के बीच शिक्षकों ने शुरु किया नवाचार

सरकार के निरंकुश रवैये के खिलाफ लॉकडाउन में अपने घरों में बंद शिक्षकों ने अब संघर्षों की कड़ी में नवाचार प्रारंभ कर दिया है। इसी क्रम में आज बिहार के हड़ताली शिक्षक परिवारों ने कोरोना महामारी व अपनी मांगों को लेकर वेदना का प्रदर्शन किया। जिलाध्यक्ष के मुताबिक लॉकडाउन का पालन करते हुए शिक्षकों ने अपने अपने घरों में शिक्षक वेदना दिवस मनाते हुए हवन, पुजन, नमाज एवं अरदास के माध्यम से आज अपनी आवाज उठायी। इस संबंध में बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति के अध्यक्ष मण्डल सदस्य प्रियरंजन सिंह, सतीश सिंह, अशोक चौधरी, गोलू सिंह, अबुल कमर, राहुल सिंह, पिंकू कुमार, मनीष कुमार एवं उपेंद्र दुबे न समवेत स्वर में कहा कि सरकार को अपने कर्मियों के प्रति संवेदनशील रुख अपनाना होगा। यह वक्त जन स्वास्थ्य और सार्वजनिक शिक्षा के प्रति सरकार के गंभीरतापूर्वक कदम उठाने का है। ऐसे में सरकार को अपनाअहम त्यागकर शिक्षकों के मसले पर चुप्पी तोड़नी चाहिए। शिक्षक नेताओं ने कहा कि कोरोना जैसी महामारी से निपटने के लिए नियोजित शिक्षकों को शामिल करते हुए सघन टीम बनाकर कोरोना के खिलाफ मजबूत मोर्चेबंदी की जा सकती है। सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए पंचायत प्रतिनिधियों व शिक्षकों को लॉकडाउन, फिजिकल डिस्टेंसिंग एवं पंचायतस्तरीय नियंत्रण के कार्य में लगाया जा सकता है। सरकार शिक्षक हड़ताल के मसले पर संवेदनशीलता के साथ निर्णय लें। बिहार का शिक्षक समाज कोरोना के विरुद्ध सरकार व जनता के साथ मजबूती से खड़ा है।

संवेदनशील पहल करे सरकार अन्यथा हड़ताल रहेगी जारी

वहीं संगठन के सचिव मंडल सदस्य ओमप्रकाश सिंह, अनिल सिंह, अस्विनी कुमार, बलिंद्र सिंह एवं दुर्गा पासवान आदि ने कहा कि कोरोना से डरकर नहीं, कोरोना से साझे तौर पर लड़कर ही मानवता की लड़ाई जीती जा सकती है। कोरोना आपदा की इस चुनौतीपूर्ण बेला में संक्रमण से केवल खुद ही नही बचना है बल्कि दूसरों को भी बचाना है। बिहार सरकार हठधर्मिता छोड़कर बिहार के हड़ताली शिक्षकों की मांगों पर संवेदनशीलता से विचार करे और शिक्षकों की हड़ताल समाप्त कराते हुए कोरोना महामारी से निपटने के लिज आपदा प्रबंधन की ठोस रणनीति बनाये। जब तक सरकार शिक्षकों को लेकर संवेदनशील पहल नहीं करेगी तबतक लॉकडाउन का पालन करते हुए सूबे में शिक्षकों की हड़ताल जारी रहेगी।

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