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Friday, April 17

केसरिया में सैकड़ों एकड़ में लगी तरबूज की फसल हो रही बर्बाद

सैकडों एकड़ में लगी तरबूज की फसल हो रही बर्बाद, किसानों की हालत खराब

न्यूज डेस्क/मोतिहारी/बिहार

" ये सिलसिला क्या यूँ ही चलता रहेगा, सियासत अपनी चालों से कब तक किसानों को छलता रहेगा."

उपरोक्त शायरी पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया प्रखंड क्षेत्र अन्तर्गत गंडक दियारा के किसानों पर आजकल बखूबी लागू हो रही है। केसरिया के गंडक दियारा में सैकडों एकड़ में लगी तरबूज की फसल तैयार है। लेकिन उसका कोई खरीदने वाला नहीं है। यहां के किसान प्रतिदिन तरबूज के व्यापारी का इंतजार कर रहे हैं, कोरोना वायरस को लेकर देश भर में जारी लॉकडाउन के कारण व्यापारी दियारा में नहीं पहुंच रहे हैं। ऐसा नहीं है कि बाहरी व्यापारी दियारा में तैयार तरबूज की फसल को खरीदना नहीं चाहते। लॉकडाउन के दौरान तैयार तरबूज की फसल को बिहार और यूपी की मंडियों में ले जाने के लिये प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गयी। जिससे सैकडों किसान मायूस हैं। तैयार फसल की समय पर बिक्री नहीं होने से दियारा के किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। ट्रक का परमिट/पास अगर मिल जाए तो किसान अपने फसल को लेकर खुद मंडियों तक जाने को तैयार हैं।

अगर नहीं बिका तैयार फसल तो होगी करोड़ों की क्षति

अगर यह तैयार फसल मंडी में बिक्री के लिए नहीं जाती है तो यहां के सैकडों किसानों को करोड़ों रुपये की क्षति होगी और ये सभी किसान फटेहाल हो जाएंगे। बताया जाता है कि तरबूज गंडक किनारे बसे दियारा क्षेत्र के किसानों की यह मुख्य फसल है। इसी फसल के भरोसे वे किसान सालों भर रहते हैं। इसी से सालों भर उनकी रोजी-रोटी चलती है। बच्चों की पढ़ाई ,  शादी-विवाह एवं अन्य कार्यों के लिए किसान इसी फसल पर आश्रित हैं।

कर्ज लेकर किसान करते हैं तरबूज की खेती

किसान कर्ज लेकर खेती करते है और फसल बेच कर कर्ज़ चूकाते हैं। इस परिस्थिति में अगर समय रहते तरबूज की फसल नहीं बिकती है तो किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हो सकते हैं। यहां के किसान अपनी तरबूज की फसल को बेचने के लिये बिहार के आरा, छपरा,मुजफ्फरपुर सहित पड़ोसी राज्य यूपी के सीमावर्ती मंडियों में ले जाते हैं। यहां के किसान तरबूज को मंडियों में ले जाने के लिये ट्रक का परमिट/पास बनवाने के लिये दर-दर भटक रहें हैं। लेकिन उनका परमिट नहीं बन रहा है।

बीडीओ-सीओ को अपनी समस्या से अवगत करा चूके हैं किसान

दियारा के किसानों ने केसरिया के बीडीओ-सीओ को भी इस समस्या से अवगत कराया है। किसान रामेश्वर सहनी ने बताया कि कर्ज लेकर वे खेती किये हैं। तरबूज तैयार है लेकिन लॉकडाउन के कारण फसल मंडी में नहीं पहुंच पा रहा है।अमरजीत सहनी ने बताया कि तरबूज की खेती से ही उनके परिवार का भरण पोषण होता है।अगर फसल ही नहीं बेकेगी तो हम लोग फटेहाल हो जाएंगे। किसान ललन महतो ने बताया कि तरबूज को मंडी में पहुंचाने के लिये अब तक प्रशासन की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गयी है। जवाहिर सहनी ने बताया कि हम लोगों ने परमिट के लिए प्रशासनिक पदाधिकारियों को आवेदन दिया है। किसान उज्जैन सहनी ने बताया कि अगर फसल नही बिकेगी तो हम लोग बर्बाद हो जाएंगे।

संग्रामपुर के तर्ज पर केसरिया में भी शिविर लगाकर मिले ट्रक का परमिट/पास

दियारा के किसानों का कहना है कि बगल के प्रखंड संग्रामपुर में जिला प्रशासन ने शिविर लगाकर तरबूज की ढुलाई के लिए ट्रक का परमिट/पास निर्गत किया है। उसी तर्ज पर प्रशासन को केसरिया प्रखंड मुख्यालय में भी शिविर लगाकर हम सभी किसानों एवं व्यापारियों को ट्रक का परमिट/पास देना चाहिए ताकि तैयार तरबूज की फसल की बिक्री हो सके।

बीडीओ करेंगी जिला परिवहन पदाधिकारी से बात

इस संदर्भ में पुछे जाने पर केसरिया की बीडीओ आभा कुमारी ने कहा कि ले जिला परिवहन पदाधिकारी से वे बात करके इस समस्या का सामाधान करायेंगी। उधर, किसानों द्वारा कॉल किए जाने पर जिला परिवहन पदाधिकारी फोन रिसीव नहीं कर रहे हैं। अब देखना यह है कि किसानों के मेहनत से तैयार तरबूज की फसल मंडियों तक बिक्री के लिए पहुंचती है या खेतों में बर्बाद होती है। खैर, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

रिपोर्ट : मधुरेश प्रियदर्शी

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