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Saturday, April 11

जहानाबाद में बच्चे का शव लेकर भटकते रहे परिजन, नहीं मिला एंबुलेंस


जहानाबाद : बच्चे की मौत के बाद भटकते रहे माता-पिता नहीं मिला एंबुलेंस, समाजसेवी ने अपनी गाड़ी से भिजवाया

न्यूज डेस्क/जहानाबाद/बिहार

मानवता को झकझोर देने वाली खबर बिहार के जहानाबाद जिला मुख्यालय से मिली है। यहां के सदर अस्पताल के चिकित्सकों द्वारा पटना रेफर किए गये बच्चे को एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिल सकी और उचित इलाज के अभाव में उसने दम तोड़ दिया। मृतक तीन वर्षीय रिशु कुमार बुखार और सर्दी से पीड़ित था। रिशु की मौत ने जहानाबाद जिले के सबसे बड़े अस्पताल की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है।

बच्चे का शव लेकर भटक रहे थे माता-पिता

इतना ही नहीं बच्चे की मौत के बाद भी उसके माता-पिता को अपने बेटे के शव को घर ले जाने के लिए भी अस्पताल प्रशासन कोई गाड़ी नहीं उपलब्ध करा सका। अपने बेटे की मौत से दुखी उसकी मां बच्चे का शव गोद में लेकर सड़क पर भटकती रही लेकिन पत्थर दिल अस्पताल प्रशासन मूकदर्शक बना रहा।
थक हारकर मृत बच्चे का शव लेकर उसके माता-पिता पैदल ही घर के लिए चल दिए। इतने में जिले के सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. एस. के. सुनील की नजर उन लोगों पर पड़ी। श्री सुनील ने अपनी गाड़ी से उन लोगों को उनके घर भिजवाया।

तीन दिनों से खराब थी बच्चे की तबीयत

मृतक बच्चे के पिता अरवल जिले के कुर्था थाना क्षेत्र के लारी शाहपुर निवासी गिरिजेश कुमार के मुताबिक उसके तीन वर्षीय पुत्र रिशु की तबीयत तीन दिनों से खराब चल थी। बच्चा सर्दी, खांसी और बुखार से पीड़ित था। शुक्रवार की सुबह वह अपने पुत्र को लेकर कुर्था के सरकारी अस्पताल पहुंचा था। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सक ने उसे जहानाबाद सदर अस्पताल रेफर कर दिया। कुर्था में उसे एंबुलेंस नहीं मिला तो वह ऑटो से अपने बच्चे को लेकर जहानाबाद सदर अस्पताल पहुंचा। यहां पहुंचने पर इलाज के दौरान चिकित्सक ने बच्चे को पटना रेफर कर दिया। सदर अस्पताल से पटना के लिए भी एंबुलेंस नहीं मिल सका।

अस्पताल के बाहर लगी थी एंबुलेंस

मृत बच्चे के पिता ने बताया कि जहानाबाद सदर अस्पताल के बाहर एक एंबुलेंस लगी थी। लेकिन, एंबुलेंस के चालक ने पटना जाने से इंकार कर दिया। अंततः उचित इलाज के अभाव में उसके बच्चे की मौत हो गई।  एंबुलेंस की अनुपलब्धता एवं उचित इलाज के अभाव में हुई मासूम बच्चे की हुई मौत  बिहार की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था का ताजा उदाहरण है। इस घटनाक्रम के बाद लोगों का कहना है कि बिहार खासकर जहानाबाद का स्वास्थ्य विभाग अब रामभरोसे चल रहा है।

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