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Tuesday, February 11

मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड : दोषी ब्रजेश ठाकुर को उम्र कैद की सजा

मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड : दोषी ब्रजेश ठाकुर को उम्र कैद की सजा


नई दिल्ली/लोकहित समाचार डेस्क : -- इस वक्त बिहार के लिए सबसे बड़ी खबर देश की राजधानी नई दिल्ली से आ रही है। दिल्ली के साकेत कोर्ट ने मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड मामले में आरोपियों की सजा का एेलान कर दिया है। इस कांड के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। सजा का ऐलान होते ही ब्रजेश ठाकुर रो पड़ा। अन्य 19 दोषियों को भी सजा सुनाई जा रही है।


बता दें कि दिल्ली स्थित साकेत कोर्ट ने चार फरवरी को सजा पर बहस पूरी कर ली थी और उसके बाद 11 फरवरी सजा की तारीख तय की गई थी। इस पूरे मामले की जांच सीबीआइ ने की थी और जांच की रिपोर्ट कोर्ट को सौंपते हुए दोषियों को अधिकतम सजा की गुहार लगायी थी।

टिस की रिपोर्ट से हुआ था खुलासा........


यहां बता दें कि TISS (Tata institute of social sciences) की विंग ‘कोशिश’ की रिपेार्ट में बालिका गृह कांड का खुलासा हुआ था, जिसकी रिपोर्ट चौंकाने वाली थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि बालिका गृह में करीब 40 से अधिक बच्चियों के साथ यौन शोषण किया गया था। नाबालिग बच्चियों ने जो बताया था वो बातें रोंगटे खड़े करने वाली थी। इस रिपोर्ट के खुलासे के बाद तहलका मच गया था।

रिपोर्ट के मुताबिक ब्रजेश ठाकुर की संस्था सेवा संकल्प एवं विकास समिति द्वारा संचालित बालिका गृह में नाबालिग बच्चियों के साथ बलात्कार सहित अन्य वीभत्स घटनाओं को अंजाम दिया जाता था। रिपेार्ट में हुए खुलासे के बाद 31 मई 2018 को मुजफ्फरपुर महिला थाने में केस दर्ज किया गया था।

बाद में बालिका गृह कांड को लेकर राजनीतिक गलियारों में तूफान सा खड़ा हो गया था। विधानसभा से लेकर लोकसभा तक विपक्षी दलों के नेताओं ने काफी हंगामा किया था। बाद में सरकार ने इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।

नियम विरुद्ध संचालित हो रहा था बालिका गृह......


 जिस तरह से नियमों की अनदेखी करके बालिका गृह का संचालन बिना रोकटोक चल रहा था और सरकारी फंड भी मिल रहा था, उससे पता चलता है कि संचालक की पैठ सियासी गलियारों से लेकर ब्यूरोक्रेसी तक थी।

एनजीओ के साथ ही वह कई तरह के अखबार का भी प्रकाशन किया करता था और इसका दफ्तर बालिका गृह के प्रांगण में ही था। सबसे दिलचस्प बात यह थी कि टिस की रिपोर्ट के बाद उसके एनजीओ को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था और इसके बावजूद उसे भिखारियों के लिए आवास बनाने के वास्ते हर महीने एक लाख रुपये का प्रोजेक्ट दिया गया था। हालांकि, बाद में इस प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया गया था।
साकेत कोर्ट द्वारा बालिका गृह कांड में सजा का ऐलान किये जाने पर सूबे के बुद्धिजीवियों ने संतोष व्यक्त किया है।

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